Joothan – Omprakash Valmiki (Hindi Edition)
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Description
पहली बार, दलित अपने जीवन के बारे में खुद लिख रहे हैं। उनके बारे में लंबे समय से दूसरे लोग, मानवविज्ञानी, इतिहासकार और उपन्यासकार लिखते रहे हैं। सदियों से चली आ रही घोर और ज़बरदस्त अन्याय के खिलाफ लड़ते हुए, दलित लेखक समानता हासिल करने की अपनी आकांक्षाओं को आवाज़ देते हैं। मूल हिंदी से पहली बार अंग्रेजी में अनूदित, ओमप्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर के पास एक गाँव में, एक अछूत जाति, चूहड़ा में, ‘दलित’ जैसे अपमानजनक शब्द के गढ़े जाने से बहुत पहले, पले-बढ़े होने की बात करती है। जैसा कि वे उदास होकर कहते हैं, ‘दलित जीवन बेहद कष्टदायक है, अनुभवों से झुलसा हुआ है; केवल वही जानता है जिसने इस पीड़ा को झेला है।”जूठन’ उन थालियों में बचे हुए टुकड़ों को संदर्भित करता है जो दलितों को खाने के लिए दी जाती हैं। कुछ मायनों में यह दलितों पर थोपे गए अपमानजनक अस्तित्व का प्रतीक है। वाल्मीकि की कहानी भयानक दुःख और उत्पीड़न, जीवन-रक्षा और उपलब्धि की कहानी है, और एक ऐसे समाज में एक स्वतंत्र मनुष्य के रूप में उनके उदय की कहानी है जो ‘दलितों के प्रति करुणाहीन’ बना हुआ है। लेखक के बारे में: कवि और साहित्यिक आलोचक ओमप्रकाश वाल्मीकि हिंदी साहित्य जगत में एक स्थापित नाम हैं। वे देहरादून स्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में कार्यरत हैं। अरुण प्रभा मुखर्जी यॉर्क विश्वविद्यालय, टोरंटो में अंग्रेजी विभाग में सहायक प्रोफेसर हैं। वे उत्तर-औपनिवेशिक अध्ययन की एक सुप्रसिद्ध विद्वान और साहित्यिक आलोचक भी हैं।
About The Author
जन्म: 30 जून, 1950, बरला, जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश। शिक्षा: एम.ए. (हिन्दी साहित्य)। प्रकाशित कृतियाँ: सदियों का संताप, बस्स! बहुत हो चुका, अब और नहीं (कविता संग्रह); जूठन (आत्मकथा) अंग्रेजी, जर्मन, स्वीडिश, पंजाबी, तमिल, मलयालम, कन्नड़, तेलगू में अनूदित एवं प्रकाशित। सलाम, घुसपैठिए (कहानी संग्रह), दलित साहित्य का सौन्दर्यशास्त्र, मुख्यधारा और दलित साहित्य, सफाई देवता (सामाजिक अध्ययन), दलित साहित्य: अनुभव, संघर्ष और यथार्थ, ।उउं ंदक वजीमत ैजवतपमे, चयनित कविताएँ। अनुवाद: सायरन का शहर (अरुण काले) कविता संग्रह का मराठी से हिन्दी में अनुवाद, मैं हिन्दू क्यों नहीं (कांचा एलैया) की अंग्रेजी पुस्तक का हिन्दी में अनुवाद, लोकनाथ यशवन्त की अनेक मराठी कविताओं का हिन्दी में अनुवाद। अन्य: 1. लगभग 60 नाटकांे में अभिनय एवं निर्देशन, 2. विभिन्न नाट्य दलों द्वारा ‘दो चेहरे’ का मंचन, 3. ‘जूठन’ के नाट्य रूपान्तरण का अनेक नगरों: जालन्धर, चंडीगढ़, लुधियाना, कैथल आदि में मंचन, 4. अनेक राष्ट्रीय सेमिनारों में हिस्सेदारी, 5. रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़ में पुनश्चर्या पाठ्यक्रम में अनेक व्याख्यान, 6. अनेक विश्वविद्यालयों, पाठ्यक्रमों में रचनाएँ शामिल, 7. प्रथम हिन्दी दलित साहित्य सम्मेलन, 1993, नागपुर के अध्यक्ष, 8. 28वें अस्मितादर्श साहित्य सम्मेलन, 2008, चन्द्रपुर, महाराष्ट्र के अध्यक्ष, 9. भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास, शिमला सोसाइटी के सदस्य। पुरस्कार/सम्मान: 1. डॉ. अम्बेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार, 1993, 2. परिवेश सम्मान, 1995, 3. जयश्री सम्मान, 1996, 4. कथाक्रम सम्मान, 2001, 5. न्यू इंडिया बुक पुरस्कार, 2004, 6. साहित्य भूषण सम्मान 2006, 7. 8वाँ विश्व हिन्दी सम्मेलन, 2007, न्यूयॉर्क, अमेरिका सम्मान, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ।
Product details
- Publisher : Radhakrishna Prakashan
- ISBN-10 : 8183616933
- ISBN-13 : 978-8183616935
- Language : Hindi
- Pages : 164
- Binding : Paperback









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