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Vaishnav Ki Phislan – Harishankar Parsai

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Description

आज के दौर में लोग अपने अंदर की कमी को दूर करने से ज्यादा दूसरों में कमी ढूंढने की तलाश में रहते हैं। लोगों को सोच ऐसी हो गई है कि उन्हें लगता है कि वह जो कहते हैं, बोलते हैं वह एकदम सही है और दूसरा व्यक्ति जो कह रहा है वह गलत है उसमें सुधार की जरूरत है। हिंदी साहित्य के एक प्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई का व्यंग्य ‘वैष्णव की फिसलन’ उन लोगों पर सटीक बैठती है तो अपनी कमियों को छिपाने के लिए नैतिकता का मुखौटा पहन लेते हैं।

‘वैष्णव की फिसलन’ हिंदी साहित्य में एक ऐसी कालजयी रचना है, जो धार्मिक पाखंड और सामाजिक दिखावे पर करारा प्रहार करती है। इस व्यंग्य में परसाई ने “बचाव पक्ष का बचपन” जैसे प्रतीकों के माध्यम से यह दिखाया कि कैसे लोग अपनी कमियों को छिपाने के लिए नैतिकता का मुखौटा पहन लेते हैं।

आज के समाज में, जहां सोशल मीडिया पर दिखावटी भक्ति, फर्जी नैतिकता और आडंबर का बोलबाला है, परसाई का यह व्यंग्य और भी प्रासंगिक हो जाता है। चाहे वह धर्म के नाम पर ठगी हो या नैतिकता का ढोंग।

वैष्णव की फिसलन आज के दौर में हमें आईना दिखाता है, जहां लोग अपनी फिसलन को छिपाने के लिए मासूमियत का बहाना बनाते हैं। परसाई की तीखी लेखनी आज भी हमें यह सवाल पूछने को मजबूर करती है। क्या हमारा समाज वाकई बदल गया है, या बस पाखंड के नए-नए रूप सामने आ रहे हैं।

About the Author

हरिशंकर परसाईजन्म: 22 अगस्त, 1924। जन्म-स्थान: जमानी गाँव, जिला होशंगाबाद (मध्य प्रदेश)। मध्यवित्त परिवार। दो भाई, दो बहिनें। स्वयं अविवाहित। परिवार में बहन, भानजे और भानजी।मैट्रिक नहीं हुए थे कि माँ की मृत्यु हो गई और लकड़ी के कोयले की ठेकेदारी करते पिता को असाध्य बीमारी। फलस्वरूप गहन आर्थिक अभावों के बीच पारिवारिक जिम्मेदारियाँ। यहीं से वास्तविक जीवन संघर्ष, जिसने ताकत भी दी और दुनियावी शिक्षा भी। फिर भी आगे पढ़े। नागपुर विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम.ए.। फिर ‘डिप्लोमा इन टीचिंग’।निधन: 10 अगस्त, 1995।प्रकाशित कृतियाँ: हँसते हैं रोते हैं, जैसे उनके दिन फिरे, (कहानी-संग्रह); रानी नागफनी की कहानी, तट की खोज (उपन्यास) तथा, तब की बात और थी, भूत के पाँव पीछे, बेईमानी की परत, वैष्णव की फिसलन, पगडण्डियों का जमाना, शिकायत मुझे भी है, सदाचार का ताबीज, विकलांक श्रद्धा का दौर (सा.अ. पुरस्कार), तुलसीदास चंदन घिसैं, हम एक उम्र से वाकिफ हैं। जाने पहचाने लोग, (व्यंग्य निबंध-संग्रह)।रचनाओं के अनुवाद लगभग सभी भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी में। मलयालम में सर्वाधिक 4 पुस्तकें।‘परसाई रचनावली’ शीर्षक से छह खंडों में संकलित रचनाएँ।

Product details

  • Publisher ‏ : ‎ Rajkamal Prakashan
  • ISBN-10 ‏ : ‎ 8126702648
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 978-8126702640
  • Author : Harishankar Parsai
  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • Pages ‏ : ‎ 550 
  • Binding : Paperback

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