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Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar

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Description

जौन एक मुँहफट, बेबाक और बागी शायर थे। आप समझ लीजिए कि अगर आज की तारीख में वे ज़िंदा होते तो पाकिस्तान में शायद क़त्ल कर दिए जाते। आप जौन को जितना पढ़ेंगे उतना जौन खुलते आएँगे। कुछ दिन में आप इस जौन वाइरस से एडिक्टड हो जाएँगे और एक तिश्नगी आपका शिकार करने लगेगी। नए शायरों की ग़ज़लें भी अब मीर, मोमिन, ग़ालिब, फ़ैज़, ख़ुमार के आगोश से सिमटती हुई जौन एलिया की बारगाह में आ गई हैं। जौन के शेर कहने का अंदाज़ ऐसा है कि उसमें ड्रामा भी है, झुंझलाहट भी है, बने बनाए नियमों को तोड़ देने की जिद भी है और दर्शन भी है। हिंदुस्तान के अमरोहा में पैदा हुए और पाकिस्तान के कराची की मिट्टी में दफ़्न हुए जौन एलिया वह शायर हैं जो हयात रहते हुए ही उर्दू अदब की दुनिया में अच्छी-ख़ासी मक़बूलियत हासिल कर गए थे। आज जब जौन हमारे बीच नहीं हैं, तो उनकी नज़्मों और ग़ज़लों के अलावा उनके ज़ाती ज़िंदगी के क़िस्से भी बड़े लगाव के साथ सुने और सुनाए जाते हैं। इस किताब में ग़ज़लें, नज़्में, क़त’आत और सबसे ख़ूबसूरत पहलू ‘जौनियत’ मतलब जौन की शख़्सियत के कुछ अनछुए पहलुओं को छूने की कोशिश की गई है। यक़ीनन इस किताब को पढ़कर आप एक नई दुनिया में दाख़िल होएँगे।

About the Author

उत्तर प्रदेश के फ़िरोज़ाबाद ज़िले से त’आल्लुक़ रखने वाले मुन्तज़िर फ़िरोज़ाबादी का अस्ल नाम अनंत भारद्वाज है। अपनी शुरूआती तालीम पूरी करके मेरठ शहर से B.Tech. की और जालंधर शहर से M.Tech की डिग्री ले चुके हैं। परिवार के लोग चाहते हैं कि प्रसाशनिक सेवा में जाएँ लेकिन इनका दिलो-दिमाग़ अदब के अलावा कहीं लगता ही नहीं। पिछले कुछ सालों से मथुरा के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। शायरी करते हैं और कभी-कभी मुशायरों एवं कवि-सम्मेलनों में शिरकत भी। जौन एलिया साहब को अपनी ज़िंदगी में वह अदद जगह देते हैं कि उनकी सुब्ह जौन के शेर से होती है। कहीं-कहीं वे जौन को अपनी शायरी में भी ले आते हैं -हमको है इश्क़ उससे जो है ‘जौन एलिया’यानी कि आपके कोई क़ाबिल न होंगे हम.

Product details

  • Publisher ‏ : ‎ Hind Yugm; Second edition 
  • ISBN-10 ‏ : ‎ 9384419990
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 978-9384419998
  • Author : Jaun Elia & Muntazir Firozabadi
  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • Pages‏ : ‎ 240 
  • Binding : Paperback

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